सबद-81

भक्ति सर्जन प्रकरण

ऊतो रहु ररा ममा की भांति हो, सभ संत उधारन चूनरी।
बालमीक बन बोइया, चुन्हि लीन्हा सुखदेव।।
करम बिनौरा होय रहा, सूत काते जैदेव।
तीनि लोक ताना तनो है, ब्रह्मा विस्नु महेस।।
नाम लेत मुनि हारिया, सुरपति सकल नरेस।
विस्नु जिभ्या गुन गाइया, बिन बस्ती का देस।।
सूने घर का पाहुना, तासों लाइनि हेत।।
चारो वेद कैड़ा किया है, निराकार कियो राछ।।
बिनै कबीरा चूनरी, मैं नहिं बांधल वारि।।

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